ट्रंप की बेहूदगी के आगे क्यों लाचार है भारत
🧨 ट्रंप की बेहूदगी के आगे क्यों लाचार है भारत
🇮🇳🇺🇸 भारत-अमेरिका संबंधों की कूटनीतिक जटिलता और पाकिस्तान के साथ संघर्ष की पृष्ठभूमि में
🔶 प्रस्तावना
डोनाल्ड ट्रंप का नाम आते ही विश्व राजनीति में एक उथल-पुथल का चेहरा उभरता है। राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल में भारत ने संयम की नीति अपनाई, भले ही ट्रंप के कई बयान बेहूदी और अपमानजनक रहे।
🧭 ट्रंप की बेहूदगियाँ
- कश्मीर पर मध्यस्थता का दावा: जुलाई 2019 में ट्रंप ने कहा मोदी ने मध्यस्थता का अनुरोध किया। भारत ने तुरंत इनकार किया।
- हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन धमकी: कोविड के दौरान भारत से दवा न मिलने पर 'बदले की कार्रवाई' की चेतावनी दी।
- भारत को 'टैरिफ किंग' कहना: अमेरिकी वस्तुओं पर ऊँचे टैरिफ को लेकर भारत की आलोचना।
- भारत-पाक मुद्दों पर अस्पष्ट रुख: पुलवामा और बालाकोट के समय संतुलन बनाए रखने की कोशिश, स्पष्ट समर्थन नहीं।
💰 अमेरिका-भारत व्यापार संघर्ष: टैरिफ युद्ध
"America First" नीति के तहत ट्रंप ने भारत से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाए। भारत ने जवाब में कुछ टैरिफ लगाए लेकिन सीमित स्तर पर।
GSP कार्यक्रम समाप्त: ट्रंप प्रशासन ने भारत को दी जा रही व्यापारिक छूट (GSP) समाप्त कर दी।
🔥 भारत-पाकिस्तान संघर्ष और ट्रंप की प्रतिक्रिया
- पुलवामा हमला और बालाकोट स्ट्राइक: ट्रंप ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की, पाकिस्तान पर खुला दबाव नहीं डाला।
- FATF पर भूमिका: अमेरिका ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखने में भूमिका निभाई, लेकिन ब्लैक लिस्ट की ओर नहीं बढ़ा।
- अनुच्छेद 370 पर बयान: ट्रंप ने दोबारा मध्यस्थता की बात दोहराई, जिससे अंतरराष्ट्रीय भ्रम पैदा हुआ।
🕊️ भारत की प्रतिक्रिया: लाचारी या रणनीति?
| कारण | विवरण |
|---|---|
| रणनीतिक संयम | संयम से अमेरिका से संबंध बिगाड़ने से बचाव। |
| मोदी-ट्रंप समीकरण | निजी दोस्ती के चलते कई मुद्दों पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई। |
| चीन का खतरा | भारत को अमेरिका के समर्थन की आवश्यकता थी। |
| व्यापार और रक्षा निर्भरता | तकनीक, रक्षा और व्यापार में अमेरिका अहम साझेदार। |
🔍 निष्कर्ष
ट्रंप के अपमानजनक रवैये के बावजूद भारत की प्रतिक्रिया को रणनीतिक चुप्पी कहा जा सकता है। यह लाचारी नहीं बल्कि एक परिपक्व, विवेकपूर्ण और संतुलित विदेश नीति की झलक है।









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