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मजबूत नेता' का मिथक बनाम वास्तविकता: क्या नरेंद्र मोदी 'भारत के पुतिन' बन सकते हैं?

  ## प्रस्तावना: नेतृत्व की शैली और शासन का अंतर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में 'मजबूत नेता' (Strongman) की अवधारणा अक्सर चर्चा का केंद्र रहती है। व्लादिमीर पुतिन का नाम इस सूची में सबसे ऊपर आता है, जो अपनी सत्ता को पिछले दो दशकों से अधिक समय से रूस में अजेय बनाए हुए हैं। दूसरी ओर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने 2014 के बाद से भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी है। क्या नरेंद्र मोदी 'भारत के पुतिन' बन सकते हैं? यह प्रश्न केवल एक तुलना नहीं, बल्कि दो भिन्न राजनीतिक संस्कृतियों, संवैधानिक ढांचों और लोकतांत्रिक इतिहासों का मुकाबला है। इस लेख में हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि क्या ऐसी तुलना का कोई धरातल है या यह केवल सतही राजनीतिक विश्लेषण है। ## 1. संवैधानिक ढांचा: संसदीय लोकतंत्र बनाम अधिनायकवादी राष्ट्रपति प्रणाली तुलना का पहला और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु वह संवैधानिक ढांचा है जिसके भीतर ये दोनों नेता काम करते हैं। ### रूस का राष्ट्रपति मॉडल व्लादिमीर पुतिन ने रूस के संविधान में 'असीमित शक्तियां' निहित कर ली हैं। उन्होंने न केवल कार्यकाल की सीमा को समाप्...

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