भारत में रोजगार

1. भारत में सरकारी बनाम निजी रोजगार भारत की कुल कार्यशील आबादी लगभग 55–57 करोड़ है। केंद्र सरकार में लगभग 31–32 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। राज्य सरकारों में लगभग 1.7–1.9 करोड़ कर्मचारी हैं। स्थानीय निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य सरकारी संस्थाओं को मिलाकर सरकारी क्षेत्र में लगभग 2.5 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत हैं। कुल रोजगार में सरकारी हिस्सेदारी लगभग 4–5% है, लेकिन संगठित और स्थिर रोजगार में इसका योगदान कहीं अधिक है। विश्लेषण सरकारी क्षेत्र रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत नहीं है, लेकिन स्थायी आय, सामाजिक सुरक्षा और मध्यवर्ग निर्माण का सबसे बड़ा स्रोत है। 2. सरकारी रिक्त पद विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में लाखों पद वर्षों से रिक्त रहे हैं। संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में समय-समय पर 8–10 लाख से अधिक पद रिक्त पाए गए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस और न्यायपालिका में भी बड़ी संख्या में रिक्तियाँ मौजूद हैं। विश्लेषण यदि केवल रिक्त पदों को भर दिया जाए तो करोड़ों लोगों की आय पर अप्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। 3. भारत का मध्यवर्ग विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत में 35–40 करोड़ लोग मध्यवर्ग का हिस्सा माने जाते हैं। भारतीय उपभोक्ता खर्च (Consumption Demand) का सबसे बड़ा भाग मध्यवर्ग से आता है। आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, बीमा और बैंकिंग क्षेत्रों की मांग का प्रमुख आधार यही वर्ग है। विश्लेषण सरकारी कर्मचारी इस मध्यवर्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी नियमित आय आर्थिक मंदी के समय भी मांग को बनाए रखती है। 4. कोविड-19 का उदाहरण 2020 में: भारत की GDP में लगभग -5.8% की गिरावट दर्ज हुई। करोड़ों निजी क्षेत्र के कर्मचारी प्रभावित हुए। CMIE के अनुसार लॉकडाउन के शुरुआती महीनों में लगभग 12 करोड़ लोगों का रोजगार प्रभावित हुआ। लेकिन: सरकारी कर्मचारियों के वेतन जारी रहे। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। सरकार ने राहत पैकेज और मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम चलाए। विश्लेषण संकट के समय राज्य की भूमिका अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने वाली शक्ति के रूप में सामने आई। 5. सार्वजनिक निवेश का महत्व भारत में: राष्ट्रीय राजमार्गों का अधिकांश विकास सरकारी निवेश से हुआ। रेलवे नेटवर्क लगभग 68,000 किलोमीटर से अधिक है। भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क रखता है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी सरकारी योजनाओं की बड़ी भूमिका रही है। विश्लेषण इन बुनियादी ढाँचों के बिना निजी उद्योगों का विकास संभव नहीं था। 6. शिक्षा क्षेत्र भारत में लगभग 15 लाख से अधिक विद्यालय हैं। सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में करोड़ों विद्यार्थी पढ़ते हैं। कई राज्यों में शिक्षक पदों की हजारों रिक्तियाँ हैं। विश्लेषण शिक्षा में सरकारी नियुक्तियाँ केवल रोजगार नहीं देतीं, बल्कि भविष्य की उत्पादक कार्यशक्ति तैयार करती हैं। 7. स्वास्थ्य क्षेत्र WHO के मानकों की तुलना में भारत में डॉक्टरों और नर्सों की उपलब्धता अभी भी चुनौतीपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ करोड़ों लोगों का प्रमुख सहारा हैं। आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ करोड़ों परिवारों को मिला है। विश्लेषण स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकारी निवेश आर्थिक उत्पादकता बढ़ाने का भी साधन है। 8. वैश्विक वित्तीय संकट 2008 2008 की मंदी में अमेरिका और यूरोप के कई बड़े निजी बैंक संकट में आ गए। अमेरिकी सरकार ने बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को बचाने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर के पैकेज दिए। लाखों लोगों की नौकरियाँ चली गईं। विश्लेषण मुक्त बाजार संकट उत्पन्न कर सकता है, लेकिन संकट से उबारने का कार्य अक्सर सरकार को ही करना पड़ता है। 9. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSUs) भारत के प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम: Oil and Natural Gas Corporation Indian Oil Corporation NTPC Coal India ये कंपनियाँ लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देती हैं तथा राष्ट्रीय राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान करती हैं। 10. एक महत्वपूर्ण आर्थिक तथ्य अर्थशास्त्री John Maynard Keynes ने बताया था कि आर्थिक मंदी के समय सरकार को खर्च बढ़ाना चाहिए, क्योंकि सरकारी व्यय मांग पैदा करता है और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करता है। उनका सिद्धांत आज भी दुनिया के अधिकांश देशों की आर्थिक नीतियों का आधार है। "भारत की अर्थव्यवस्था का अनुभव बताता है कि निजीकरण विकास की गति बढ़ा सकता है, किंतु आर्थिक स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और मध्यवर्गीय क्रय-शक्ति का सबसे बड़ा आधार अभी भी सरकारी नियोजन और सार्वजनिक रोजगार है। वैश्विक संकटों के समय बाजार डगमगा सकता है, परंतु राज्य की संस्थाएँ अर्थव्यवस्था को संभालने का कार्य करती हैं। इसलिए निजीकरण और सरकारी नियोजन को विरोधी नहीं, बल्कि पूरक शक्तियों के रूप में देखना चाहिए।" भारत में रोजगार संरचना कुल कार्यशील आबादी की तुलना में सरकारी क्षेत्र का अनुमानित रोजगार। 0 15 30 45 60 कुल कार्यशील आबादी सरकारी रोजगार मध्यवर्ग (अनुमानित) ग्राफ की व्याख्या कुल कार्यशील आबादी लगभग 56 करोड़। सरकारी क्षेत्र में लगभग 2.5 करोड़ कर्मचारी। भारत का मध्यवर्ग लगभग 38 करोड़ लोगों का माना जाता है। सरकारी रोजगार का प्रतिशत कम दिखाई देता है, लेकिन यह संगठित रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और मध्यवर्गीय उपभोग का प्रमुख आधार है। लेख में जोड़ने योग्य टिप्पणी "भारतीय अर्थव्यवस्था में सरकारी कर्मचारियों की संख्या कुल श्रमबल की तुलना में कम है, लेकिन उनकी स्थिर आय, सामाजिक सुरक्षा और नियमित उपभोग क्षमता बाजार में मांग को स्थिर बनाए रखती है। यही कारण है कि आर्थिक संकटों के दौरान भी मध्यवर्गीय मांग पूरी तरह नहीं टूटती और अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता है।" Category Data / Estimate Notes Total Workforce 55–57 crore Estimated working population Central Government Employees 31–32 lakh Approximate State Government Employees 1.7–1.9 crore Approximate Total Government Employment 2.5+ crore Including local bodies/PSUs Government Share of Employment 4–5% Approximate Vacant Government Posts 8–10 lakh+ Various departments Indian Middle Class 35–40 crore Various estimates COVID-19 GDP Change (2020) -5.8% India GDP contraction Employment Impact During Lockdown ~12 crore CMIE estimate PDS Beneficiaries 80+ crore Food support recipients Railway Network 68,000+ km Approximate network length Schools in India 15 lakh+ Approximate 📊 Download: India_Employment_Structure_English.jpg

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