भारतीयों में डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता का ग्राफ क्यों गिरा?

 


Donald Trump कभी भारतीयों, विशेषकर शहरी मध्यवर्ग और प्रवासी भारतीयों के एक हिस्से में काफी लोकप्रिय थे। उनकी चीन-विरोधी नीति, आतंकवाद पर कठोर रुख, भारत के साथ सार्वजनिक मंचों पर निकटता और व्यक्तिगत नेतृत्व शैली ने उन्हें समर्थन दिलाया। लेकिन हाल के समय में भारतीय जनमत के कुछ वर्गों में उनकी लोकप्रियता में कमी महसूस की गई है। इसके पीछे कई कारण हैं।


1. भारत के प्रति अपेक्षाओं और व्यवहार में अंतर


दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीनों में भारत को यह उम्मीद थी कि अमेरिका उसे एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में और अधिक महत्व देगा। लेकिन व्यापार, शुल्क और आर्थिक मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख कई लोगों को निराश करने वाला लगा। इससे यह धारणा बनी कि अमेरिका "मित्रता" से अधिक "लेन-देन" की नीति अपना रहा है।


2. पाकिस्तान के प्रति बदलता दृष्टिकोण


यदि अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान के साथ सुरक्षा या सामरिक संपर्क बढ़ाता दिखाई देता है, तो भारत में स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा होता है। भारतीय जनमत लंबे समय से अमेरिका की पाकिस्तान नीति को लेकर संवेदनशील रहा है।


3. भारत-पाक तनावों पर अपेक्षित समर्थन का अभाव


भारत में यह अपेक्षा रहती है कि सीमा-पार आतंकवाद या क्षेत्रीय तनाव के मामलों में अमेरिका स्पष्ट रूप से भारत के पक्ष में खड़ा होगा। जब अमेरिकी बयान अधिक संतुलित या तटस्थ दिखाई देते हैं, तो कुछ लोगों को यह भारत के हितों के अनुरूप नहीं लगता।


4. व्यापार और वीज़ा संबंधी चिंताएँ


ट्रंप की "America First" नीति का प्रभाव भारतीय आईटी उद्योग, पेशेवरों और व्यापारिक हितों पर भी पड़ सकता है। वीज़ा नियमों और व्यापारिक दबावों को लेकर भी चिंता रही है।


5. रूस और ईरान पर अमेरिकी दबाव


भारत की विदेश नीति "रणनीतिक स्वायत्तता" पर आधारित है। भारत रूस से रक्षा सहयोग और ईरान से ऊर्जा तथा क्षेत्रीय संपर्क बनाए रखना चाहता है। इन मुद्दों पर अमेरिकी दबाव को भारत में कई लोग अपने राष्ट्रीय हितों के विपरीत मानते हैं।


6. चीन के विरुद्ध अपेक्षाओं का पुनर्मूल्यांकन


पहले यह धारणा थी कि ट्रंप चीन के विरुद्ध भारत के सबसे बड़े रणनीतिक सहयोगी होंगे। लेकिन बाद के घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा है। भारत को समर्थन भी उसी सीमा तक मिलता है जहाँ अमेरिकी हित उससे मेल खाते हैं।


क्या ट्रंप भारत में अलोकप्रिय हो गए हैं?


ऐसा कहना सही नहीं होगा। भारत में ट्रंप के प्रति राय एकरूप नहीं है।


एक वर्ग उन्हें मजबूत और निर्णायक नेता मानता है।


दूसरा वर्ग उनकी नीतियों को अत्यधिक लेन-देन आधारित और अप्रत्याशित मानता है।


तीसरा वर्ग मानता है कि किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति की नीति अंततः अमेरिकी राष्ट्रीय हितों से संचालित होती है, इसलिए किसी एक व्यक्ति से अत्यधिक अपेक्षाएँ नहीं रखनी चाहिए।



निष्कर्ष


ट्रंप की लोकप्रियता में आई कमी का मुख्य कारण केवल उनका व्यक्तित्व नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती अपेक्षाएँ और अमेरिकी नीतियों का अधिक व्यावहारिक एवं हित-केंद्रित स्वरूप है। जब भारतीयों को यह महसूस होता है कि अमेरिका भारत के बजाय अपने आर्थिक और सामरिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है, तो जनमत में स्वाभाविक बदलाव आता है।


अंततः भारत के लिए सबसे बड़ा सबक यही है कि विदेश नीति व्यक्तियों पर नहीं, बल्कि स्थायी राष्ट्रीय हितों पर आधारित होनी चाहिए। भारत-अमेरिका संबंध भी तभी दीर्घकाल तक मजबूत रहेंगे, जब वे पारस्परिक हितों और समान रणनीतिक उद्देश्यों पर टिके हों, न कि किसी एक नेता की लोकप्रियता पर।

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