G7 समिट 2024 और 2025 की तुलना: भारत-पाक युद्ध की छाया में

 

G7 शिखर सम्मेलन, वैश्विक नेतृत्व और नीतिगत दिशा का परिचायक होता है। 2024 में इटली के पुगलिया और 2025 में जापान के ओसाका में आयोजित दो सम्मेलनों में भारत की उपस्थिति ने एक नई अंतरराष्ट्रीय धुरी को जन्म दिया। यह वह दौर था जब विश्व बदलती तकनीक, उभरते संघर्षों और शक्ति संतुलन की नई कहानी लिख रहा था — और इसी कालखंड में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने भी एक अंतरराष्ट्रीय विमर्श को जन्म दिया।

यह लेख इन दोनों सम्मेलनों की तुलना करते हुए उस छाया को विश्लेषित करता है जो भारत-पाक तनाव की पृष्ठभूमि में वैश्विक नीति और भारत की भूमिका को प्रभावित कर रही थी।


1. वैश्विक परिदृश्य और भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि:

2024: इस वर्ष G7 सम्मेलन का आयोजन रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक मंदी और जलवायु संकट की पृष्ठभूमि में हुआ। भारत की भूमिका एक स्थिर साझेदार और विकासशील विश्व की आवाज के रूप में रही।

2025: 2025 तक आते-आते वैश्विक परिदृश्य और अधिक जटिल हो चुका था। ईरान-इज़राइल संघर्ष बढ़ चुका था, दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता अधिक स्पष्ट थी, और भारत-पाकिस्तान सीमा पर आतंकवादी घटनाओं में तेज़ी से तनाव वैश्विक चिंता बन चुका था।


2. भारत की उपस्थिति: भूमिका का विकास

2024 में: भारत ने वैश्विक दक्षिण की आवाज बनकर, जलवायु न्याय, डिजिटल समावेशन और बहुपक्षीय सुधार की मांग उठाई। यह एक कूटनीतिक, शांति प्रिय और साझेदारी पर आधारित भूमिका थी।

2025 में: भारत की भूमिका अब केवल नीति निर्माता की नहीं, बल्कि संकट प्रबंधक, सुरक्षा नेतृत्वकर्ता और रणनीतिक सहयोगी की हो चुकी थी। भारत ने आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और ऊर्जा संप्रभुता जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रुख दिखाया।


3. युद्ध की छाया: भारत-पाकिस्तान तनाव का प्रभाव

2024: इस समय तक भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव था, लेकिन वह नियंत्रण रेखा तक सीमित था। G7 में आतंकवाद पर भारत का रुख स्पष्ट था, लेकिन किसी विशेष देश को नामित नहीं किया गया।

2025: फरवरी 2025 में भारत में एक बड़ा आतंकवादी हमला हुआ, जिसके तार पाकिस्तान से जुड़े पाए गए। इसके बाद भारत ने सीमित सैन्य कार्रवाई और वैश्विक मंचों पर कड़ा रुख अपनाया। इस पृष्ठभूमि में G7 समिट 2025 में भारत की उपस्थिति पूरी तरह से रणनीतिक, सशक्त और निर्णायक रही।

भारत ने पाकिस्तान को राज्य प्रायोजित आतंकवाद का स्रोत बताते हुए वैश्विक प्रतिबंधों की मांग की। कई देशों ने इस पर समर्थन भी जताया।


4. जलवायु और पर्यावरण पर दृष्टिकोण:

2024: भारत ने 'LiFE' मिशन और ऊर्जा न्याय को वैश्विक एजेंडे में शामिल करने का प्रस्ताव दिया।

2025: भारत ने हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धि और 'ग्रीन क्रेडिट' की वैश्विक प्रणाली के निर्माण की मांग की।


5. डिजिटल डिप्लोमेसी:

2024: भारत का DPI मॉडल (UPI, DigiLocker, CoWIN) पहली बार वैश्विक स्तर पर चर्चा में आया। कई देशों ने इसे अपनाने की रुचि जताई।

2025: अब भारत इन तकनीकों के निर्यातक के रूप में उभरा था। जापान, फ्रांस, ब्राजील जैसे देशों ने भारत से डिजिटल साझेदारी के MoU किए।


6. आतंकवाद और सुरक्षा:

2024: भारत ने सामान्य रूप से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग की बात कही।

2025: भारत ने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद, पाकिस्तान में आतंकी पनाहगाह, साइबर टेररिज्म, और आतंकी फंडिंग पर कठोर कार्रवाई की मांग की। साथ ही भारत ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह अपने रक्षा अधिकार का प्रयोग करेगा।


7. बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार:

दोनों वर्षों में भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IMF और WTO में विकासशील देशों के लिए न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व की मांग की, लेकिन 2025 में इस मांग को और अधिक आक्रामक एवं तात्कालिक रूप में रखा गया।


8. भारत का वैश्विक छवि परिवर्तन:

2024: भारत एक उदार, संतुलित और तकनीकी उन्नत राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत हुआ।

2025: भारत ने स्वयं को एक वैश्विक शक्ति, एक निर्णायक नेतृत्वकर्ता और एक राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जो आतंक, युद्ध और संकट की घड़ी में विश्व का मार्गदर्शन कर सकता है।


9. निष्कर्ष:

G7 समिट 2024 और 2025 के बीच भारत की भूमिका केवल व्यापक नहीं, बल्कि अधिक निर्णायक, मुखर और वैश्विक रूप से प्रभावी हो गई है। इन सम्मेलनों में भारत का विकास केवल एक आर्थिक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में हुआ।

भारत-पाक तनाव की छाया ने वैश्विक मंचों पर भारत की गंभीरता, मजबूती और रणनीतिक सोच को और उभार दिया। भारत अब न केवल वैश्विक दक्षिण की आवाज है, बल्कि G7 जैसे क्लबों के लिए भी एक अनिवार्य साझेदार बन चुका है।

इन दोनों सम्मेलनों की तुलना से स्पष्ट होता है कि भारत अब विश्व राजनीति की परिधि पर नहीं, केंद्र में है — और उसके निर्णय, नीति और नेतृत्व से विश्व का भविष्य प्रभावित होगा।

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