G7 समिट 2024 में भारत की उपलब्धियाँ

G7 समिट 2024 में भारत की उपलब्धियाँ

भूमिका:

G7 समिट 2024 इटली के सुंदर तटीय क्षेत्र पुगलिया में आयोजित हुआ। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्विक आर्थिक असंतुलन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संकट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका और यूक्रेन-रूस संघर्ष जैसे ज्वलंत वैश्विक मुद्दों पर विचार करना था। भारत, हालांकि G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन उसे एक महत्वपूर्ण अतिथि राष्ट्र के रूप में आमंत्रित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की भूमिका इस सम्मेलन में अत्यंत प्रभावशाली रही।

वैश्विक दक्षिण की आवाज:

भारत ने समिट में 'वैश्विक दक्षिण' यानी विकासशील देशों की आवाज को पुरजोर ढंग से उठाया। मोदी ने यह स्पष्ट किया कि विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय अंतर को केवल साझेदारी से पाटा जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

ऊर्जा न्याय और सतत विकास:

भारत ने समिट में 'ऊर्जा न्याय' की अवधारणा को वैश्विक एजेंडा में शामिल करने का आग्रह किया। मोदी ने बताया कि भारत ने लाखों लोगों को स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच दिलाई है और अब दुनिया को भी ऐसी समावेशी नीतियों की आवश्यकता है।

डिजिटल इंडिया और DPI का वैश्विक विस्तार:

भारत का डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) मॉडल - जिसमें UPI, DigiLocker, और CoWIN जैसे प्लेटफ़ॉर्म शामिल हैं - को समिट में व्यापक सराहना मिली। यूरोपीय और अफ्रीकी देशों ने भारत से इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखाई।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारत का दृष्टिकोण:

भारत ने समिट में AI की नैतिकता और उसके नियंत्रित उपयोग पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "AI का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि मानवता के विरुद्ध।" भारत ने 'AI for All' सिद्धांत को प्रस्तुत किया जो वैश्विक मंच पर एक नई सोच बनकर उभरी।

जलवायु नेतृत्व:

भारत ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में अपना नेतृत्व प्रस्तुत किया। समिट में इस बात की सराहना की गई कि भारत ने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करते हुए विकास की गति बनाए रखी है।

अफ्रीका और वैश्विक साझेदारी:

मोदी ने अफ्रीका के देशों को वैश्विक विकास में सहभागी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने 'वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर' का G20 मंत्र दोहराया और वैश्विक समरसता की भावना को सामने रखा।

आतंकवाद पर रुख:

यद्यपि भारत ने पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन वैश्विक मंच पर कहा गया कि कुछ देश आतंकवाद को परोक्ष या प्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं। मोदी ने कहा, "आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं हो सकता और इसे किसी भी रूप में सहन नहीं किया जाना चाहिए।"

बहुपक्षीय सुधारों की माँग:

भारत ने संयुक्त राष्ट्र, WTO और अन्य वैश्विक संस्थाओं में सुधार की माँग उठाई। G7 नेताओं ने भारत की इस बात से सहमति जताई कि वर्तमान वैश्विक ढांचा बदलती सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है।

भारत-इटली द्विपक्षीय संबंध:

इस समिट में भारत और इटली के बीच रक्षा, ब्लू इकोनॉमी, उच्च शिक्षा, और साइबर सुरक्षा में सहयोग के लिए अनेक MoUs पर हस्ताक्षर हुए। इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने भारत को 'वैश्विक स्थिरता का स्तंभ' कहा।

निष्कर्ष:

G7 समिट 2024 में भारत की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल एक विकासशील देश नहीं, बल्कि वैश्विक विमर्श का नेतृत्वकर्ता राष्ट्र है। समिट में भारत की नीति, दृष्टिकोण और संवाद शैली ने उसे दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच एक ठोस और नैतिक स्थान दिलाया। भारत ने विकासशील देशों की आवाज बनकर न केवल अपनी भूमिका को परिभाषित किया, बल्कि विश्व को नई दिशा भी दी।

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