पख्तूनों (पश्तूनों) का रुख: भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में
खैबर पख्तूनख्वा और सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले पख्तून (पश्तून) समुदाय का राजनीतिक और सामाजिक रुख एक जटिल इतिहास से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक रूप से, पख्तूनों का रुख पाकिस्तान की केंद्रीय सत्ता और उसकी नीतियों के प्रति बेहद असंतोषजनक रहा है, जबकि भारत के प्रति उनके दृष्टिकोण में ऐतिहासिक जुड़ाव और सांस्कृतिक अपनापन झलकता है।
1. पाकिस्तान की केंद्रीय सत्ता और सेना के प्रति असंतोष
* डूरंड लाइन का विवाद: पख्तून समुदाय कभी भी अंग्रेजों द्वारा खींची गई 'डूरंड लाइन' (जो पख्तूनों की भूमि को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विभाजित करती है) को एक वैध सीमा के रूप में स्वीकार नहीं करता है।
* आतंकवाद और युद्ध का केंद्र: पिछले दो दशकों से पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी (ISI) की नीतियों के कारण खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र आतंकवाद, सैन्य अभियानों और विस्थापन का मुख्य अखाड़ा बन गया है। पाकिस्तानी सेना के अभियानों में आम पख्तून नागरिकों को हुए भारी नुकसान ने जनता और सेना के बीच एक गहरी खाई पैदा कर दी है।
* पश्तून तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट (PTM): मंजूर पश्तून के नेतृत्व में उभरा 'पश्तून तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट' (PTM) लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से पख्तूनों के मानवाधिकारों, लापता व्यक्तियों (Missing Persons) की रिहाई और पाकिस्तानी सेना के दमन के खिलाफ एक बहुत बड़ा जन-आंदोलन बन चुका है।
2. भारत के प्रति दृष्टिकोण
* ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अपनापन: सीमांत गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान (बादशाह खान) के समय से ही पख्तून नेतृत्व का एक बड़ा वर्ग अहिंसा, स्वतंत्रता और भारत के साथ वैचारिक-सांस्कृतिक नजदीकी के पक्ष में रहा है।
* सकारात्मक जनमानस: आम पख्तून जनता और बुद्धिजीवी वर्ग भारत को सांस्कृतिक रूप से एक मित्रवत और प्रगतिशील देश के रूप में देखता है। पाकिस्तानी हुकूमत चाहे जितना भी भारत-विरोधी जहर उगले, पख्तून समाज के भीतर भारत की फिल्मों, संगीत, कला और उसके लोकतंत्र के प्रति एक स्वाभाविक आकर्षण और सम्मान का भाव हमेशा से रहा है।
* राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण: पख्तून समुदाय यह अच्छी तरह समझता है कि पाकिस्तान की कट्टरपंथी और युद्ध-उन्मुख नीतियां उनके क्षेत्र के विनाश का मुख्य कारण हैं। वे एक शांत, स्थिर और व्यापार-अनुकूल दक्षिण एशिया के पक्षधर हैं, जहाँ भारत के साथ बेहतर संबंध क्षेत्र की समृद्धि के लिए फायदेमंद साबित हो सकें।
निष्कर्ष
पख्तूनों का रुख स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की दमनकारी और सामरिक रूप से विफल व्यवस्था के खिलाफ है। वे अपनी पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा के विपरीत, भारत के प्रति पख्तून समाज का रुख न केवल शत्रुतामुक्त है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सद्भाव पर आधारित एक सकारात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।









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