अमेरिका और चीन: पाकिस्तान की वर्तमान दशा के असली रणनीतिक सूत्रधार

 

पाकिस्तान की मौजूदा आंतरिक और बाहरी दुर्दशा के पीछे आंतरिक कुशासन के साथ-साथ महाशक्तियों—विशेषकर अमेरिका और चीन—की अवसरवादी नीतियां भी इसकी वास्तविक जड़ में हैं। पाकिस्तान ने अपनी सामरिक स्थिति (Geopolitical Location) को इन देशों के हाथों में गिरवी रख दिया, जिसके चलते वह खुद अपने ही बुने हुए जाल में फंसता चला गया।

1. अमेरिका की उपयोगितावादी और छद्म नीतियां (The U.S. Factor)

अमेरिका ने शीत युद्ध के दौर से लेकर 'आतंक पर युद्ध' (War on Terror) तक, पाकिस्तान का इस्तेमाल केवल अपने तात्कालिक भू-राजनीतिक हितों को साधने के लिए किया।

 * किराए की फौज की तरह इस्तेमाल: अमेरिका ने सोवियत संघ के खिलाफ अफगान युद्ध में और बाद में मध्य एशिया में अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी (ISI) को वित्तीय और सैन्य सहायता दी।

 * अस्थिरता का पोषण: अमेरिका ने पाकिस्तान को परोक्ष रूप से प्रॉक्सी वार (Proxy War) लड़ने के लिए बढ़ावा दिया। जब अमेरिका के रणनीतिक हित पूरे हो गए, तो उसने पाकिस्तान को उसके हाल पर अकेला छोड़ दिया। आज अमेरिकी नीतियां पाकिस्तान की आंतरिक अर्थव्यवस्था को संभालने के बजाय केवल उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (IMF) के जरिए नियंत्रित करती हैं।

2. चीन का 'डेट ट्रैप' और साम्राज्यवादी विस्तार (The China Factor)

हाल के दशकों में अमेरिका की जगह चीन ने पाकिस्तान पर अपनी पकड़ मजबूत की है, लेकिन यह दोस्ती कम और आर्थिक गुलामी का सौदा ज्यादा साबित हुई है।

 * सीपीईसी (CPEC) और संप्रभुता का हनन: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) ग्वादर बंदरगाह और बलूचिस्तान से होकर गुजरता है। इस प्रोजेक्ट ने बलूच जनता के बीच असंतोष को और भड़काया है, क्योंकि स्थानीय संसाधनों का दोहन चीन के मुनाफे के लिए किया जा रहा है और बलूचों को उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

 * ऋण का जाल (Debt Trap): चीन ने पाकिस्तान को भारी-भरकम कर्ज देकर ऐसे वित्तीय संकट में धकेल दिया है जहां पाकिस्तान अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए भी बीजिंग का मुंह ताकता है। चीन के लिए पाकिस्तान केवल भारत को घेरने और अपने 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) को आगे बढ़ाने का एक मोहरा मात्र है।

निष्कर्ष

यह कहना बिल्कुल सही है कि पाकिस्तान की समस्याओं को गहराने और उसे इस दलदल में धकेलने में अमेरिका और चीन की दोहरी नीतियों का बहुत बड़ा हाथ है। इन महाशक्तियों ने पाकिस्तान को कभी एक आत्मनिर्भर, लोकतांत्रिक और स्थिर राष्ट्र बनने ही नहीं दिया। उन्होंने उसे हमेशा एक सैन्य अखाड़ा और बाजार बनाए रखा, जिसका परिणाम आज बलूचिस्तान, पख्तूनिस्तान और पीओके की अशांति तथा देश के आर्थिक दिवालियापन के रूप में सामने आ रहा है।


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