पीओके (PoK) में आज़ादी की मांग: वर्तमान आक्रोश और उसके कारण
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK - Pakistan-administered Kashmir) में पिछले कुछ समय से स्थानीय स्तर पर आज़ादी, बुनियादी अधिकारों और पाकिस्तान सरकार के दमनकारी रवैये के खिलाफ जबरदस्त असंतोष देखने को मिल रहा है। हालांकि इस क्षेत्र पर पाकिस्तान का प्रशासनिक नियंत्रण है, लेकिन वहां की आम जनता अब खुलकर पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ सड़कों पर उतर रही है।
1. विरोध प्रदर्शनों और आज़ादी की मांग के मुख्य कारण
* आर्थिक शोषण और महंगाई:
पीओके के लोग लगातार इस बात का विरोध करते रहे हैं कि उनकी भूमि पर बने मंगला बांध और अन्य जलविद्युत परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली का पूरा लाभ पाकिस्तान के अन्य हिस्सों (विशेषकर पंजाब) को मिलता है, जबकि स्थानीय लोगों को भारी-भरकम बिजली के बिल, महंगाई और भयंकर बिजली कटौती (Load Shedding) का सामना करना पड़ता है।
* बुनियादी अधिकारों का अभाव:
पाकिस्तान के संविधान के तहत पीओके को पूर्ण और वास्तविक प्रांतीय दर्जा प्राप्त नहीं है। यहां के लोगों को पाकिस्तान की संसद में मतदान का अधिकार नहीं है और प्रशासनिक नियंत्रण सीधे इस्लामाबाद से बैठे नौकरशाहों या सेना के हाथ में होता है।
* दमन और मानवाधिकार हनन:
जब भी स्थानीय नागरिक अपनी मांगों को लेकर या बढ़े हुए करों (Taxes) और आटे की कीमतों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, तो पाकिस्तानी सुरक्षा बल और पुलिस उन पर भारी बल प्रयोग करते हैं। इस दमनकारी नीति ने स्थानीय जनता के मन में पाकिस्तान के प्रति नफरत और अलगाव की भावना को और गहरा कर दिया है।
2. आंदोलनों का स्वरूप
* संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (Joint Awami Action Committee):
हाल के वर्षों में पीओके में बिजली दरों और आटे पर सब्सिडी में कटौती के खिलाफ बड़े पैमाने पर जन-आंदोलन खड़े हुए हैं। इन प्रदर्शनों में न केवल आर्थिक मांगें उठाई गईं, बल्कि पाकिस्तानी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मुखर विरोध भी देखने को मिला।
* 'आज़ादी' और भारत-विलय के स्वर:
प्रदर्शनों के दौरान स्थानीय जनता द्वारा पाकिस्तान विरोधी नारे लगाना और कई मंचों पर भारत के साथ मिलने या एक स्वतंत्र पहचान की चर्चा होना यह दर्शाता है कि पाकिस्तानी शासन प्रणाली से वहां का जनमानस पूरी तरह त्रस्त हो चुका है।
निष्कर्ष
पीओके में उठ रही आज़ादी और अधिकारों की मांग इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान अपने ही कब्जे वाले क्षेत्रों में जनता का विश्वास जीतने में पूरी तरह असफल रहा है। दशकों से चले आ रहे शोषण, प्रशासनिक उपेक्षा और सैन्य नियंत्रण के कारण वहां की जनता अब पाकिस्तान के साथ रहने को लेकर पूरी तरह से असंतुष्ट है, जो पाकिस्तानी राज्य की आंतरिक कमजोरी को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।









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