भारत-पाकिस्तान की 'बाइनरी' उलझन और चीन का उदय: पाकिस्तानी ज़मीन पर हथियारों की खतरनाक प्रयोगशाला
दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक इतिहास का सबसे बड़ा विमर्श यह रहा है कि पिछले सात दशकों से इस पूरे उपमहाद्वीप की नीति, मीडिया और रणनीतिक चर्चाओं को "भारत बनाम पाकिस्तान" की द्विपद्वंद (Binary) में उलझा कर रख दिया गया है। जब भी इस क्षेत्र की बात होती है, ध्यान स्वतः ही दोनों देशों के बीच के तनाव, क्रिकेट, सीमा विवाद और पारंपरिक युद्धों पर टिक जाता है।
लेकिन इस संकीर्ण बाइनरी (Binary) उलझन के बहुत बड़े मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक लाभ का फायदा उठाकर चीन ने अपनी विस्तारवादी और साम्राज्यवादी चालों से इस क्षेत्र में जो बढ़त बनाई है, वह आज दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए एक भीषण संकट बन चुकी है। इस भू-राजनीतिक विडंबना का सबसे वीभत्स रूप यह है कि आज पाकिस्तान अपनी संप्रभुता को पूरी तरह गिरवी रखकर चीन के आधुनिक और अछूते सैन्य हथियारों की एक जीवंत 'प्रयोगशाला' (Testing Laboratory) बनकर रह गया है।
इस पूरी स्थिति के सामरिक और भू-राजनीतिक निहितार्थ को इन आयामों से समझा जा सकता है:
1. भारत-पाकिस्तान की 'बाइनरी' और चीन की गुप्त छलांग
* ध्यान भटकाने का चक्रव्यूह: पाकिस्तान का पूरा सैन्य-राजनीतिक तंत्र हमेशा से इस बात में माहिर रहा है कि वह अपनी जनता और वैश्विक समुदाय का ध्यान अपनी आंतरिक विफलताओं, भुखमरी और दिवालियापन से हटाकर हमेशा भारत के साथ कृत्रिम और भावनात्मक टकराव पर केंद्रित रखे।
* चीन का शांत विस्तार: जिस समय भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी और छद्म युद्धों के चक्रव्यूह में उलझे हुए थे, ठीक उसी आड़ का फायदा उठाकर चीन ने दक्षिण एशिया, हिंद महासागर, म्यांमार, श्रीलंका और मध्य एशिया में अपने आर्थिक और सामरिक पाँव मजबूती से जमा लिए। चीन ने भारत को क्षेत्रीय स्तर पर उलझाए रखने की इस रणनीति का खुलकर इस्तेमाल किया और चुपचाप दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी महाशक्ति बन गया।
2. पाकिस्तान: चीनी हथियारों की सजीव 'प्रयोगशाला' (Testing Lab)
आज पाकिस्तान की सेना के पास अपनी कोई स्वदेशी रक्षा तकनीक या आत्मनिर्भर उद्योग नहीं बचा है। अपनी रक्षा जरूरतों और सत्ता बचाने के लिए वह पूरी तरह बीजिंग पर आश्रित हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप, पाकिस्तान आज चीनी रक्षा उपकरणों और हथियारों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी ओपन-एयर लेबोरेटरी बन गया है:
* ड्रोन और मिसाइल तकनीक का परीक्षण: चीन अपने अत्याधुनिक सैन्य ड्रोन (Wing Loong श्रृंखला), मिसाइलें, और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम सीधे तौर पर पाकिस्तान की जमीन और उसकी सेना के माध्यम से टेस्ट करवाता है। पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति और भारत के साथ उसकी तनातनी चीन को अपने हथियारों की 'युद्ध-क्षमता' (Combat Readiness) की बिना किसी जोखिम के जांच करने का सबसे मुफ़्त और आसान मंच देती है।
* सैन्य साजो-सामान और जे-10 (J-10) फाइटर जेट: पाकिस्तानी वायुसेना द्वारा चीनी जेट्स या अन्य हथियारों का इस्तेमाल करना वस्तुतः चीन के रक्षा बाजार के लिए एक 'मार्केटिंग कैंपेन' और टेक्निकल फीडबैक लेने का जरिया मात्र है। पाकिस्तान की फौजी हुकूमत ने अपने देश को चीन की रक्षा कंपनियों की कॉलोनी बना दिया है, जहाँ पाकिस्तानी सैनिक केवल चीनी हथियारों के 'टेस्ट पायलट' या खरीदार बनकर रह गए हैं।
3. संप्रभुता का पतन और 'डेट-ट्रैप' का बंधन
चीनी हथियारों और कर्ज की इस प्रयोगशाला बनने की कीमत पाकिस्तान ने अपनी वास्तविक स्वतंत्रता खोकर चुकाई है:
* ग्वादर और बलूचिस्तान का चीनी अधिग्रहण: CPEC (चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) और ग्वादर बंदरगाह पर प्रत्यक्ष चीनी नियंत्रण यह साबित करता है कि पाकिस्तान अब एक संप्रभु राष्ट्र नहीं, बल्कि चीन की इंडो-पैसिफिक और हिंद महासागर की रणनीतिक नीति का एक मोहरा मात्र है।
* रणनीतिक निर्भरता: पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसी (ISI) आज अपने आंतरिक फैसलों के लिए भी बीजिंग की रजामंदी देखने के लिए मजबूर है। चीन के हथियारों और पैसों पर पलने वाला यह देश अब चीन की एशिया-नीति का एक प्यादा बन चुका है, जिसका इस्तेमाल वह भारत को असहज करने के लिए करता है।
निष्कर्ष
भारत और पाकिस्तान की इस पारंपरिक 'बाइनरी' (Binary) सोच ने लंबे समय तक उपमहाद्वीप के रणनीतिक विचारकों को जकड़े रखा, जिसका सबसे बड़ा फायदा चीन ने उठाया। एक तरफ जहाँ भारत अपनी स्वतंत्र तकनीकी प्रगति, अंतरिक्ष अभियानों और आर्थिक शक्ति के बल पर वैश्विक महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान अपनी संकीर्ण मानसिकता और भारत-विरोध की जिद के कारण चीनी हथियारों और रणनीति की एक बेजान प्रयोगशाला बनकर अपने ही पतन के रास्ते पर आगे बढ़ चुका है।
यह समझना अनिवार्य है कि दक्षिण एशिया का वास्तविक भू-राजनीतिक मुकाबला अब भारत और पाकिस्तान के बीच नहीं, बल्कि भारत और चीन के उस साम्राज्यवादी षड्यंत्र के बीच है, जिसने पाकिस्तान को अपने छद्म युद्ध का एक मोहरा बना रखा है।









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