भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोग और विश्वास बहाली: पाकिस्तान के संकट से निकलने का एकमात्र मार्ग
पाकिस्तान के समक्ष आज जो आंतरिक और बाहरी संकट खड़े हैं, उनसे मुक्ति पाने का और देश को स्थिरता की ओर ले जाने का केवल एक ही वास्तविक और स्थायी मार्ग बचता है—भारत के साथ दीर्घकालिक सहयोग और विश्वास की बहाली। महाशक्तियों की स्वार्थी नीतियों और छद्म मित्रों के छलावे से बाहर निकलकर यदि पाकिस्तान ने क्षेत्रीय यथार्थ को स्वीकारा नहीं, तो उसका पतन और अधिक गहरा हो सकता है।
विश्वास बहाली और सहयोग के प्रमुख आधार
* कट्टरता और शत्रुता का त्याग:
पाकिस्तान को अपनी स्थापित भारत-विरोधी नीतियों और प्रॉक्सी वार के एजेंडे को पूरी तरह त्यागना होगा। जब तक राज्य स्तर पर आतंकवाद को पनाह दी जाती रहेगी, तब तक किसी भी प्रकार की शांति वार्ता संभव नहीं है।
* आर्थिक एकीकरण और व्यापार:
दोनों देश यदि अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य कर लें और मुक्त व्यापार, ऊर्जा गलियारों (जैसे तापी या ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन के क्षेत्रीय विकल्प) तथा पारगमन (Transit) सुविधाओं को खोल दें, तो इसका सीधा लाभ दोनों देशों की आम जनता को मिलेगा। भारत का बाजार और उसकी बढ़ती आर्थिक ताकत पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने में सबसे बड़ा मददगार साबित हो सकती है।
* क्षेत्रीय स्थिरता और शांति:
बलूचिस्तान, पख्तूनिस्तान और पीओके की समस्याओं का सैन्य दमन से समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए एक लोकतांत्रिक, शांत और क्षेत्रीय रूप से एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जो केवल भारत के साथ अच्छे और प्रगाढ़ पड़ोसी संबंध होने पर ही संभव है। जब सीमा पार से तनाव कम होगा, तो आंतरिक संसाधनों का उपयोग दमन की जगह विकास और जन-कल्याण पर किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
महाशक्तियों ने पाकिस्तान को केवल अपने मोहरे की तरह इस्तेमाल किया है, जबकि भारत के साथ उसकी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक साझीदारियां हैं। यदि पाकिस्तान अपने अहंकार और अतीत की कड़वाहट को छोड़कर भारत के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का मार्ग चुनता है, तो दक्षिण एशिया से गरीबी, अशांति और अस्थिरता का नामों-निशन मिट सकता है और दोनों देश मिलकर प्रगति के एक नए युग की शुरुआत कर सकते हैं।









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