पश्चिम एशिया के खिलाड़ियों का दक्षिण एशिया में प्रवेश और बढ़ती अस्थिरता
तुर्किए और सऊदी अरब जैसे पश्चिम एशियाई देशों का अपनी प्राथमिकताओं और भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के तहत दक्षिण एशिया के मामलों में हस्तक्षेप करना, और विशेष तौर पर पाकिस्तान के रास्ते इस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाना, दक्षिण एशिया की शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
जब पश्चिम एशिया की भू-राजनीति और वहां के सत्ता समीकरण दक्षिण एशिया की नाजुक जमीन पर उतरते हैं, तो इसके परिणाम बेहद घातक होते हैं:
1. पश्चिम एशिया की अशांति का दक्षिण एशिया की ओर विस्तार
* वैचारिक और सामरिक हस्तक्षेप: पश्चिम एशिया लंबे समय से sectarian (संप्रदाय आधारित) संघर्षों, गृहयुद्धों और अस्थिरता का केंद्र रहा है। जब तुर्किए या अन्य बाहरी ताकतें पाकिस्तान के माध्यम से दक्षिण एशिया में अपने प्रभाव का विस्तार करती हैं, तो वे अपने साथ कट्टरता, वैचारिक टकराव और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का वह जहर भी ले आती हैं, जो पहले से ही उस क्षेत्र को तबाह कर रहा है।
* पाकिस्तान का प्रॉक्सी प्लेटफॉर्म: पाकिस्तान अपनी अंदरूनी असफलताओं और कूटनीतिक अलगाव से उबरने के लिए इन देशों को भारत के खिलाफ एक मंच के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करता है। इससे दक्षिण एशिया का वह स्वाभाविक भौगोलिक और सांस्कृतिक ताना-बाना बिगड़ जाता है, जिसे आपसी व्यापार और शांति के रास्ते आगे बढ़ना चाहिए था।
2. पाकिस्तान के रास्ते प्रवेश से दक्षिण एशिया में गहरे खतरे
* आतंकवाद और कट्टरपंथ को ऑक्सीजन: पाकिस्तान की सरज़मीं पहले से ही आतंकवाद का गढ़ बन चुकी है। जब तुर्किए जैसे देश सैन्य साजो-सामान (जैसे ड्रोन तकनीक) या सामरिक समर्थन के जरिए पाकिस्तान के साथ गठजोड़ मजबूत करते हैं, तो इससे पाकिस्तानी सेना और चरमपंथी तत्वों के हौसले बुलंद होते हैं। इसका सीधा असर भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति पर पड़ता है।
* कृत्रिम गुटबंदी (Bloc Politics): दक्षिण एशिया को शांति, विकास, गरीबी उन्मूलन और आर्थिक सहयोग की जरूरत है। लेकिन पाकिस्तान के रास्ते पश्चिम एशियाई प्रभावों का प्रवेश इस क्षेत्र को एक बार फिर शीत युद्ध जैसी कृत्रिम और खतरनाक गुटबंदी में धकेल देता है, जिससे क्षेत्रीय सहयोग के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं।
3. क्षेत्रीय संप्रभुता और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती
* बाहरी ताकतों का क्रीड़ा स्थल: दक्षिण एशिया के देश यदि अपनी आंतरिक समस्याओं को सुलझाने के बजाय पश्चिम एशिया या अन्य बाहरी ताकतों को अपने यहाँ सामरिक अड्डे या प्रभाव जमाने की छूट देंगे, तो यह पूरा उपमहाद्वीप महाशक्तियों और क्षेत्रीय खिलाड़ियों का अखाड़ा बन जाएगा।
* अस्थिरता का चक्र: जिस प्रकार पश्चिम एशिया के कई देश आंतरिक संघर्षों से जूझ रहे हैं, वही अस्थिरता पाकिस्तान के रास्ते दक्षिण एशिया के दरवाजे तक पहुँच रही है। जब तक पाकिस्तान अपनी ज़मीन का इस्तेमाल बाहरी और कट्टरपंथी ताकतों को सौंपना बंद नहीं करेगा, तब तक इस पूरे क्षेत्र में अमन-चैन कायम होना असंभव है।
निष्कर्ष
तुर्किए और सऊदी अरब जैसे देश भले ही अपनी वैश्विक या क्षेत्रीय महत्वकांक्षाओं के तहत पश्चिम एशिया में सक्रिय हों, लेकिन पाकिस्तान के रास्ते दक्षिण एशिया में उनका यह प्रवेश इस क्षेत्र के लिए किसी वरदान से कम और एक बड़े अभिशाप से ज्यादा साबित हो रहा है। यह दक्षिण एशिया की शांति, प्रगति और स्थिरता की रीढ़ को तोड़ने का एक ऐसा षड्यंत्र है, जो पूरे उपमहाद्वीप को नई अशांति के दौर में धकेल रहा है।









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